📰 रीवा: 20 वर्षों से अनुपस्थित महिला शिक्षिका की पोल खुली — फर्जी दस्तावेज़ों से नौकरी में वापसी की कोशिश, हाईकोर्ट ने किया भंडाफोड़

📍 रीवा, मध्य प्रदेश (K C News)

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक महिला शिक्षिका, जो पिछले 20 वर्षों से अनुपस्थित थी, ने सेवा में दोबारा शामिल होने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज़ों का सहारा लिया। मामला जब हाईकोर्ट तक पहुंचा तो पूरा घोटाला सामने आ गया।

जानकारी के अनुसार, रीवा ज़िले के मऊगंज ब्लॉक में पदस्थ यह शिक्षिका वर्ष 2004 से लगातार अनुपस्थित थी। इस दौरान विभागीय कार्रवाई भी नहीं हुई और किसी ने भी उसकी अनुपस्थिति पर गंभीर ध्यान नहीं दिया। हाल ही में महिला ने वापसी के लिए आवेदन किया और दावा किया कि वह बीमारी के चलते ड्यूटी पर नहीं आ सकी थी। उसने मेडिकल सर्टिफिकेट सहित कई दस्तावेज़ विभाग में प्रस्तुत किए।

लेकिन जांच में ये दस्तावेज़ फर्जी निकले। विभाग ने रिपोर्ट कोर्ट में पेश की, जिसके बाद हाईकोर्ट ने महिला को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि “सरकारी नौकरी कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है कि जब चाहे तब छोड़ दें और जब मन हो तब वापस लौट आएं।”

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित शिक्षा अधिकारी और बीईओ यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसे मामलों में विभागीय सतर्कता बरती जाए। यह मामला सरकारी तंत्र में निगरानी की कमी और जवाबदेही की कमजोरी को उजागर करता है।

K C News विश्लेषण:
यह घटना केवल एक शिक्षिका की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की लापरवाही का प्रतीक है। 20 साल की अनुपस्थिति के बावजूद जब तक विभाग को भनक नहीं लगी, यह सवाल उठाता है कि सरकारी रिकॉर्ड मॉनिटरिंग कितनी कमजोर है।

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