🚨 बड़ी खबर रीवा से:
“रीवा शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमराई — हर दिन घंटों तक जाम में फंसे लोग” | K C News रीवा
रीवा, मध्य प्रदेश | 11 नवंबर 2025 (मंगलवार)
रीवा शहर इन दिनों एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है — ट्रैफिक जाम। कभी सड़क चौड़ी करने की योजनाएँ बनीं, तो कभी पार्किंग सुधार की घोषणाएँ; लेकिन हकीकत में हालात पहले से और बिगड़ चुके हैं। सुबह-शाम का समय आते ही कॉलेज रोड, पद्मधर पार्क, सर्किट हाउस चौराहा और बस स्टैंड क्षेत्र में वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
K C News को मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासन की कई बार की बैठकें और ट्रैफिक पुलिस के अस्थायी अभियान भी इस जाम-जाल को सुलझा नहीं पाए हैं।
📍 शहर का जाम-हॉटस्पॉट मैप
रीवा के निवासी अब हर दिन औसतन 25-30 मिनट अतिरिक्त सिर्फ जाम में फंसे रहते हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र:
- मुख्य बस स्टैंड रोड – दिन-भर ऑटो और टैक्सी की कतारें।
- सर्किट हाउस चौराहा – लगातार निर्माण कार्य और सिग्नल विफलता।
- राजा तालाब – नई गढ़ी रोड – भारी ट्रक और स्कूल वैन के कारण स्थायी जाम।
- विश्वविद्यालय चौराहा और हॉस्पिटल रोड – एम्बुलेंस तक को रास्ता नहीं मिल पाता।
🚗 बढ़ते वाहन और सीमित सड़कें
रीवा शहर में RTO रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले 5 वर्षों में दो-पहिया और चार-पहिया वाहनों की संख्या 65% बढ़ी, लेकिन सड़कों की चौड़ाई जस-की-तस रही।
- वर्ष 2020 में वाहन संख्या: 1.85 लाख
- वर्ष 2025 में अनुमानित: 3.05 लाख
यानी हर महीने करीब 2,000 नए वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं।
परिणामस्वरूप, ट्रैफिक पुलिस के पास न तो पर्याप्त कर्मी हैं, न आधुनिक कैमरे या कंट्रोल रूम।
🧍♂️ आम जनता की परेशानी
हर दिन सुबह दफ्तर और स्कूल जाने वाले लोग 15-20 मिनट तक धीरे-धीरे सरकते रहते हैं।
स्थानीय नागरिक राजेश पांडेय कहते हैं,
“रीवा की सड़कें गड्ढों और जाम से भरी हैं। ट्रैफिक सिग्नल काम नहीं करते, ऊपर से सब्ज़ी वालों और ठेले वालों ने आधी सड़क घेर रखी है।”
रीवा मेडिकल कॉलेज रोड पर हालात इतने खराब हैं कि कई बार मरीजों को अस्पताल पहुंचने में देर हो जाती है।
🧱 विकास कार्य और अव्यवस्था
नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत पानी-निकासी व फ्लाईओवर निर्माण के काम लगातार चल रहे हैं। लेकिन इन कार्यों ने शहर के मुख्य मार्गों को संकरा बना दिया है।
- बस स्टैंड रोड पर खुदाई और पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा है।
- विश्वविद्यालय चौराहा पर निर्माण सामग्री पड़े रहने से ट्रैफिक का आधा हिस्सा अवरुद्ध रहता है।
नगर निगम अधिकारी मानते हैं कि “काम जरूरी हैं”, लेकिन नागरिकों की नाराज़गी लगातार बढ़ रही है।
🧩 पुलिस और प्रशासन का पक्ष
ट्रैफिक डीएसपी ने बताया कि कुछ दिन पहले से One-Way सिस्टम का ट्रायल चल रहा है, जिसमें रानी तालाब रोड से स्टेशन रोड तक सीमित वाहनों को प्रवेश दिया जा रहा है।
इसके अलावा,
- शहर में 12 नए ट्रैफिक सिग्नल लगाने की योजना।
- प्रमुख चौराहों पर CCTV-सर्विलांस की प्रक्रिया।
- बिना-हेलमेट और नो-पार्किंग पर सख्त चालान।
पर नागरिकों का कहना है कि यह सब कागजों में अच्छा लगता है, ज़मीनी हकीकत अब भी वैसी ही है।
🏍️ क्या हो सकते हैं स्थायी समाधान?
- इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक-मैनेजमेंट सिस्टम – स्मार्ट सिटी के अंतर्गत कंट्रोल रूम बनाया जाए।
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधार – बस सेवाओं को बढ़ाया जाए ताकि निजी वाहन निर्भरता कम हो।
- नो-पार्किंग-ज़ोन सख्ती से लागू – खासकर अस्पताल और स्कूल क्षेत्रों में।
- ऑटो व ई-रिक्शा रूट फिक्स करें – हर सवारी वाहन का ठहराव नियत हो।
- सड़क चौड़ीकरण और फुटपाथ व्यवस्था – राहगीरों व वाहनों के लिए अलग लेन।
💬 विशेषज्ञ क्या कहते हैं
रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज के ट्रांसपोर्ट इंजीनियरिंग विशेषज्ञ प्रो. अमित तिवारी का कहना है:
“रीवा जैसे उभरते शहरों में अगर ‘स्मार्ट सिटी’ टैग को सार्थक बनाना है तो सड़क डिज़ाइन और यातायात अनुशासन को तकनीकी रूप से मजबूत करना ही होगा।”
📉 जनता की आवाज़
रीवा सोशल मीडिया ग्रुप्स में लोग #RewaTrafficJam ट्रेंड चला रहे हैं।
शहर के युवा नागरिक साइकिल-रैली निकालकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
अनेक लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो “रीवा माईक्रो-मेट्रो” की जरूरत पड़ सकती है।
🧭 निष्कर्ष
रीवा का ट्रैफिक संकट सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है।
जब तक हर नागरिक नियमों का पालन नहीं करेगा और प्रशासन नीतिगत दृढ़ता नहीं दिखाएगा, तब तक “स्मार्ट सिटी” का सपना केवल नारे में रह जाएगा।
रीवा को साफ, सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात वाला शहर बनाने के लिए सभी पक्षों को एक-साथ आगे आना होगा।
0 Comments