रीवा बेला सीमेंट प्लांट विवाद: 300 मजदूरों का हंगामा, 8 घंटे ड्यूटी और ओवरटाइम की मांग पर टकराव

रीवा बेला सीमेंट प्लांट विवाद: 300 मजदूरों का हंगामा, 8 घंटे ड्यूटी और ओवरटाइम की मांग पर टकराव

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रीवा, मध्यप्रदेश: रीवा जिले के बेला क्षेत्र स्थित एक प्रमुख सीमेंट प्लांट में सोमवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब लगभग 300 मजदूरों ने प्लांट गेट के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला 8 घंटे की ड्यूटी और नियमानुसार ओवरटाइम भुगतान की मांग से जुड़ा हुआ है।

क्या है पूरा विवाद?

सूत्रों के अनुसार, पैकिंग यूनिट में कार्यरत मजदूरों का आरोप है कि उनसे लंबे समय से निर्धारित समय से अधिक कार्य कराया जा रहा है। श्रमिकों का कहना है कि स्पष्ट शिफ्ट व्यवस्था लागू नहीं है और कई बार 18 से 20 घंटे तक लगातार काम करना पड़ता है। इसके बावजूद उन्हें श्रम कानूनों के अनुसार ओवरटाइम भुगतान नहीं दिया जा रहा।

बताया जा रहा है कि ये मजदूर पिछले 15 से 20 वर्षों से यहां कार्यरत हैं और कई बार प्रबंधन के समक्ष अपनी मांग रख चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

स्थिति क्यों हुई गंभीर?

तनाव उस समय बढ़ गया जब प्रबंधन द्वारा बाहरी मजदूरों को बुलाकर प्लांट में लोडिंग कार्य शुरू कराया गया। आरोप है कि पुराने मजदूरों को गेट के बाहर रोक दिया गया, जिससे उनमें आक्रोश फैल गया।

इसके बाद सैकड़ों मजदूर प्लांट गेट के सामने एकत्र हो गए और नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई।

श्रमिकों की मुख्य मांगें

  • 8 घंटे की नियमित शिफ्ट व्यवस्था लागू की जाए
  • नियमों के अनुसार ओवरटाइम भुगतान सुनिश्चित किया जाए
  • पुराने मजदूरों को कार्य से न हटाया जाए
  • प्रबंधन और श्रमिकों के बीच औपचारिक वार्ता कराई जाए

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

प्रदर्शनकारी मजदूरों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन और श्रम विभाग ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। फिलहाल प्रशासन की ओर से किसी आधिकारिक बयान की पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, श्रम विभाग मामले की जानकारी ले रहा है और संभावित वार्ता की तैयारी की जा रही है।

कानूनी और श्रम कानून का पहलू

भारत में श्रम कानूनों के अनुसार किसी भी औद्योगिक इकाई में कार्य की अवधि सामान्यतः 8 घंटे निर्धारित की जाती है। इससे अधिक समय कार्य लेने की स्थिति में ओवरटाइम भुगतान अनिवार्य होता है। यदि मजदूरों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह श्रम कानूनों के उल्लंघन का मामला बन सकता है।

आगे क्या?

अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और श्रम विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या वर्षों से कार्यरत मजदूरों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, या यह विवाद और गहराएगा — यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।


Disclaimer: यह समाचार विभिन्न स्थानीय स्रोतों और मौके पर मौजूद श्रमिकों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आधिकारिक पुष्टि या प्रबंधन की प्रतिक्रिया मिलने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।

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