Holi 2026: होलिका दहन की ऐतिहासिक कथा और Khabar Chetna News की शुभकामनाएं
भारत का सबसे रंगीन और उल्लासपूर्ण त्योहार होली केवल रंगों का पर्व नहीं बल्कि आस्था, प्रेम और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
होलिका दहन की ऐतिहासिक कथा
प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नामक एक अत्याचारी राजा था, जो स्वयं को भगवान मानता था। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। यह बात हिरण्यकश्यप को बिल्कुल पसंद नहीं थी।
राजा ने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार भगवान विष्णु की कृपा से वह सुरक्षित बच गया। अंत में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया, जिसे अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था।
होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई। इसी घटना की याद में हर वर्ष होलिका दहन किया जाता है।
होलिका दहन का महत्व
- बुराई पर अच्छाई की जीत
- अहंकार का अंत
- सत्य और भक्ति की विजय
- समाज में प्रेम और भाईचारे का संदेश
रंगों की होली का संदेश
अगले दिन धुलेंडी या रंगों की होली मनाई जाती है, जहां लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर गिले-शिकवे मिटाते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में प्रेम, सौहार्द और सकारात्मकता बनाए रखें।
🌸 Khabar Chetna News की ओर से होली की हार्दिक शुभकामनाएं 🌸
रंगों का यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि और नई ऊर्जा लेकर आए।
आप और आपके परिवार को होली की ढेरों शुभकामनाएं।
- टीम Khabar Chetna News
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